February 9, 2026

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यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखण्ड, मुख्यमंत्री धामी ने पेश की मिसाल

उत्तराखण्ड में विवाह पंजीकरण में ऐतिहासिक उछाल, 24 गुना वृद्धि

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यूसीसी के लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण को लेकर अभूतपूर्व जागरूकता देखने को मिली है। आंकड़ों के अनुसार, पुराने अधिनियम की तुलना में प्रतिदिन होने वाले विवाह पंजीकरण की औसत संख्या में लगभग 24 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया था, जिसे सत्ता में आने के बाद उन्होंने पूरा कर दिखाया। मुख्यमंत्री ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही यूसीसी लागू करने का निर्णय लिया। सभी आवश्यक औपचारिकताओं, विशेषज्ञों की राय और व्यापक जनमत संग्रह के बाद प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी कानून प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया।

मुख्यमंत्री का यह ऐतिहासिक निर्णय सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में एक साहसिक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों—विशेष रूप से महिलाओं—को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है। यूसीसी के अंतर्गत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और उनसे जुड़े प्रावधानों को शामिल किया गया है। इस कानून के तहत महिला और पुरुषों के लिए विवाह की समान आयु निर्धारित की गई है, साथ ही सभी धर्मों में तलाक एवं अन्य प्रक्रियाओं के लिए समान और कड़े प्रावधान किए गए हैं। यूसीसी के लागू होने से बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगी है, जिससे महिलाओं को विशेष संरक्षण मिला है।

यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक मात्र छह माह की अवधि में विवाह पंजीकरण की संख्या 3 लाख से अधिक पहुंच गई है। इसके विपरीत, वर्ष 2010 में लागू पुराने अधिनियम के अंतर्गत 26 जनवरी 2025 तक कुल 3,30,064 विवाह पंजीकरण ही हुए थे। प्रतिदिन के औसत पर नजर डालें तो पुराने अधिनियम के तहत जहां प्रतिदिन लगभग 67 विवाह पंजीकरण होते थे, वहीं यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 1634 प्रतिदिन तक पहुंच गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि,

“उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का एक ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। यूसीसी का उद्देश्य किसी भी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान प्रदान करना है। विवाह पंजीकरण में आई अभूतपूर्व वृद्धि यह दर्शाती है कि जनता ने इस कानून को स्वीकार किया है और इसे एक सकारात्मक सामाजिक सुधार के रूप में देखा है। उत्तराखण्ड ने पूरे देश को एक नई दिशा दी है और मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाएंगे।”

यूसीसी के सफल क्रियान्वयन के साथ उत्तराखण्ड ने सामाजिक सुधार और सुशासन की दिशा में एक नया मानक स्थापित किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है।