October 16, 2026

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हिमालयी आपदाओं से निपटने में AI की होगी अहम भूमिका, सतत विकास में स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी: मुख्य सचिव

देहरादून, 15 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को दून विश्वविद्यालय में “बदलती जलवायु में हिमालय: आपदाएं, सतत विकास एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों से निपटने, आपदाओं का आकलन करने और जोखिम कम करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्य सचिव ने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के साथ सतत विकास की योजनाओं में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

आपदा प्रबंधन और पूर्वानुमान में तकनीक का इस्तेमाल जरूरी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और संवेदनशीलता के कारण कई तरह की चुनौतियों का सामना करता है। ऐसे में आपदाओं का आकलन करने, उनके संभावित प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने और प्रभावी योजनाएं तैयार करने के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित समाधान स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किए जाने चाहिए, ताकि उनका लाभ आम लोगों तक पहुंच सके और आपदा जोखिम को कम करने में मदद मिले।

‘स्मॉल AI’ से कम संसाधनों में विकसित होंगे प्रभावी समाधान

संगोष्ठी में दक्षिण कैरोलिना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तथा आईएआईआरओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं संस्थापक निदेशक प्रो. अमित शेठ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उभरती तकनीक ‘स्मॉल AI’ की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि कम संसाधनों में सुलभ और प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित करके भारत की विशिष्ट विकास संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार सामने आने वाली आपदाओं से निपटने और उनके प्रभाव को कम करने में भी इन तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

अनुसंधान को बढ़ावा देने पर दिया जोर

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के संयुक्त सचिव डॉ. निशांत वर्मा ने दून विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे शोध और अनुसंधान के वातावरण की सराहना की। उन्होंने देश में अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा शोध के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में एएनआरएफ की भूमिका पर जानकारी दी।

वहीं, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध संबंधी उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और शोधार्थियों के निरंतर प्रयासों से विश्वविद्यालय में अनुसंधान गतिविधियों को मजबूत किया जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन और हिमालयी चुनौतियों पर होगा मंथन

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन से हिमालयी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले खतरों, आपदा आकलन, जोखिम न्यूनीकरण, सतत विकास और शोध एवं निर्णय प्रक्रिया में AI के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

संगोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और दून विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं भूविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

इस संगोष्ठी का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विचार-विमर्श करना है।