October 16, 2026

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भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत करने पर जोर, पीएम मोदी और एस. जयशंकर से मिलीं कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद

नई दिल्ली: भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

बैठक में भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर चल रही वार्ताओं को जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य भी चर्चा के केंद्र में रहा।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 23.66 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था। दोनों देश व्यापारिक संबंधों के विस्तार के साथ निवेश और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।

‘टीम कनाडा ट्रेड मिशन’ के साथ बढ़ेगा आर्थिक सहयोग

कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के नेतृत्व में ‘टीम कनाडा ट्रेड मिशन’ भी भारत में सक्रिय है। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्कों और कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देना है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच भी द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बातचीत हो चुकी है। इन उच्चस्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

दिसंबर 2026 में कनाडा जा सकते हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर 2026 में कनाडा दौरे पर जाने की संभावना जताई गई है। प्रस्तावित यात्रा को भारत-कनाडा संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, दोनों देशों के बीच हालिया बैठकों और व्यापारिक संपर्कों का मुख्य उद्देश्य आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना, व्यापार बढ़ाना और रक्षा, तकनीक, ऊर्जा तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं तलाशना है।