November 8, 2026

UKND

Hindi News

23 साल पुराने मामले ने फिर पकड़ा तूल, हरक सिंह रावत पर जैनी ने लगाए गंभीर आरोप; बेटे के DNA टेस्ट और केस दोबारा खोलने की मांग

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत से जुड़े 23 साल पुराने मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। जैनी (इंद्राणी देवड़ी) ने देहरादून में प्रेसवार्ता कर हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है। उनके आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

जैनी का दावा है कि वर्ष 2003 में जब कथित घटना हुई थी, तब वह नाबालिग थीं और उनकी उम्र करीब 16 से 17 वर्ष थी। उन्होंने उस समय हुई डीएनए जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपने 23 वर्षीय बेटे के पितृत्व की पुष्टि के लिए दोबारा डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उनके बेटे को पिता का नाम और पहचान मिलनी चाहिए।

जैनी ने यह भी आरोप लगाया कि कथित घटना के बाद उन्हें मानसिक अस्पताल में रखा गया था और उन पर दबाव बनाकर जबरन हस्ताक्षर कराए गए थे। उन्होंने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को लिखित शिकायत सौंपकर पुराने मामले को दोबारा खोलने और निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है।

हरक सिंह रावत ने आरोपों को किया खारिज

वहीं, हरक सिंह रावत ने जैनी की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वर्ष 2003 में इस मामले की जांच सीबीआई कर चुकी है और उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है। उन्होंने दावा किया कि उस समय की डीएनए रिपोर्ट में भी आरोप साबित नहीं हुए थे।

हरक सिंह रावत ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश करार देते हुए इसके पीछे सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हाथ होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाने और फंसाने के लिए यह पूरा घटनाक्रम सामने लाया गया है।

23 साल पुराने मामले की दोबारा जांच की मांग और हरक सिंह रावत के पलटवार के बाद उत्तराखंड की राजनीति में यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। अब सबकी नजरें पुलिस की कार्रवाई और शिकायत पर होने वाली जांच पर टिकी हैं।