June 2, 2026

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आगामी मानसून एवं आपदा प्रबंधन तैयारियों की समीक्षा; डीएम ने विभागों से 7 दिवस में मांगा माइक्रो प्लान

आपदा प्रबंधन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, प्रत्येक विभाग जमीनी स्तर पर तैयारी सुनिश्चित करे: डीएम

आपदा कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

देहरादून, 01 जून 2026। आगामी मानसून सीजन को देखते हुए जनपद में आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सभी विभागों को सात दिवस के भीतर माइक्रो लेवल प्लान तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप जमीनी स्तर पर प्रभावी तैयारी सुनिश्चित करे।

जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं सभी नगर निकायों को नदी-नालों और जल निकासी तंत्र की युद्धस्तर पर सफाई कर सात दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही जलभराव संभावित क्षेत्रों के लिए टास्क फोर्स एवं कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा दैनिक प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।

उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों को संभावित रूप से संपर्क-विहीन होने वाले गांवों की सूची तैयार करने, जलभराव प्रभावित स्थलों का चिन्हीकरण करने तथा त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) गठित करने के निर्देश दिए। नदी किनारे बसे गांवों की सुरक्षा के लिए पृथक कार्ययोजना तैयार करने तथा तहसील स्तर पर उपलब्ध संसाधनों एवं उपकरणों का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने को भी कहा गया।

लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एनएचएआई को जनपद के सभी लैंडस्लाइड जोन का पुनः सत्यापन कर आवश्यक मशीनरी एवं मानव संसाधन अग्रिम रूप से तैनात रखने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा के दौरान मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा उनके पूर्व चिन्हीकरण की कार्रवाई पूरी कर ली जाए।

स्वास्थ्य विभाग को संवेदनशील एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों का चिन्हीकरण कर सुरक्षित प्रसव की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही डेंगू, मलेरिया एवं अन्य जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए सर्विलांस, फीवर क्लीनिक, जांच एवं दवा उपलब्धता संबंधी विस्तृत माइक्रो प्लान सात दिवस में प्रस्तुत करने को कहा गया।

मुख्य शिक्षा अधिकारी को ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए जहां विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नदी-नालों अथवा भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक शैक्षणिक व्यवस्था विकसित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर गांव स्तर पर शिक्षण व्यवस्था संचालित करने के निर्देश भी दिए गए।

विद्युत विभाग को जर्जर पोल, झूलती विद्युत लाइनों एवं जोखिमपूर्ण ढांचों की तत्काल मरम्मत करने, जबकि जल संस्थान एवं पेयजल निगम को आपदा के दौरान पेयजल आपूर्ति बनाए रखने एवं क्षतिग्रस्त लाइनों की शीघ्र बहाली के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग, एनएचएआई एवं पीएमजीएसवाई को अपने अधिकार क्षेत्र के सभी पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने तथा आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य मानसून से पूर्व पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही जिन नदियों एवं गदेरों में ड्रेजिंग की आवश्यकता है, वहां तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि आगामी मानसून को देखते हुए सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए आपदा पूर्व तैयारी, त्वरित राहत एवं प्रभावी बचाव व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसून अवधि में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जाएं।

बैठक में नगर क्षेत्रों के जलभराव संभावित स्थलों, आपदा शिकायतों के त्वरित निस्तारण, आपदा न्यूनीकरण कार्यों, आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन, मसूरी के लंढौर बाजार में भू-धंसाव, खाद्य एवं ईंधन उपलब्धता, पशु चारा बैंक तथा सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों के साथ समन्वय सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।