देहरादून। उत्तराखंड में लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से 29 मई 2026 से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की महत्वपूर्ण प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू की गई। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO Uttarakhand) के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की मतदाता सूची को पूरी तरह से शुद्ध, सटीक और त्रुटिरहित बनाना है
प्रथम चरण: प्रशिक्षण और प्रपत्रों की छपाई
अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए एक चरणबद्ध समय-सारिणी तय की गई थी। इसके तहत 29 मई से 7 जून 2026 तक पहले चरण की गतिविधियां पूरी की गईं। इस शुरुआती अवधि में राज्यभर में बड़े पैमाने पर गणना प्रपत्रों (Enumeration Forms) की छपाई का काम किया गया। इसके साथ ही, घर-घर जाकर डेटा जुटाने वाले बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) और संबंधित प्रशासनिक कर्मचारियों को व्यापक तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे बिना किसी विसंगति के प्रविष्टियों का सत्यापन कर सकें।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, 8 जून से 7 जुलाई 2026 तक बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों के वितरण और संकलन का सघन अभियान चलाया गया। इस बार निर्वाचन विभाग ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए लगभग 89 प्रतिशत फॉर्मों का डिजिटल माध्यम से सत्यापन सुनिश्चित किया है।
इस गहन कवायद के बाद 14 जुलाई 2026 को राज्य की ड्राफ्ट (प्रारूप) मतदाता सूची का प्रकाशन भी किया जा चुका है। इस प्रक्रिया के माध्यम से दोहराव वाले, मृत और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जबकि 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर नए पात्र युवाओं के नाम जोड़े जा रहे हैं। दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद, 15 सितंबर 2026 को अंतिम निर्वाचक नामावली का प्रकाशन किया जाएगा।

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