November 3, 2026

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उत्तराखंड को 2047 तक 28 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य, CM धामी ने लॉन्च किया ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये दोनों पहलें प्रदेश में सुशासन को मजबूत बनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने और उत्तराखंड के समग्र विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सरकार की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना है। कई बार जानकारी के अभाव में पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। वहीं, नागरिकों को एक ही जानकारी के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने और विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। देवभूमि परिवार पोर्टल इन समस्याओं को कम करने और सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने में मदद करेगा।

प्रत्येक परिवार को मिलेगी विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी

प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि देवभूमि परिवार पोर्टल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सभी परिवारों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। पोर्टल पर पंजीकरण के बाद प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट ‘देवभूमि परिवार आईडी’ प्रदान की जाएगी।

इस पोर्टल के माध्यम से परिवार और उनके सदस्यों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान, विभागों के बीच समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। साथ ही नागरिकों को बार-बार दस्तावेज जमा करने और अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।

पोर्टल के जरिए योजनाओं की निगरानी, लाभार्थियों की जरूरतों का आकलन तथा सरकारी बजट एवं संसाधनों का बेहतर नियोजन भी किया जा सकेगा। इसके संचालन के लिए राज्य स्तर पर देवभूमि परिवार प्राधिकरण और जिला स्तर पर जिला देवभूमि परिवार अधिकारी की व्यवस्था प्रस्तावित है।

2047 तक 28 लाख करोड़ की होगी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था

‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ में प्रदेश के दीर्घकालिक विकास के लिए लगभग 440 संकेतकों के आधार पर लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत वर्ष 2047 तक उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये और प्रतिव्यक्ति आय को लगभग 20 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा बेरोजगारी दर को 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विजन में कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

राज्य की स्थापित ऊर्जा क्षमता को लगभग 22 हजार मेगावाट तक बढ़ाने और वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लिए अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित कर विभागीय कार्ययोजनाओं और नियमित समीक्षा पर जोर दिया गया है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। प्रदेश की तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था डेढ़ गुना से अधिक बढ़ चुकी है। पिछले एक वर्ष में प्रदेश की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि और रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी राज्य में हो रहे बदलावों को दर्शाती है।

कनेक्टिविटी और पर्यटन को मिल रही नई गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने बाबा केदार की पावन भूमि से कहा था कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। इसी प्रेरणा के साथ राज्य सरकार प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना से प्रदेश की कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों के साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन और शीतकालीन यात्रा को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का विकास मॉडल ‘प्रकृति के साथ प्रगति’ पर आधारित होना चाहिए। हिमालय, नदियां, वन संपदा और सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की पहचान हैं। इसलिए प्रत्येक विकास योजना में पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एवं खजान दास, विधायक सविता कपूर, सेतु आयोग के सलाहकार दिनेश अग्रवाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सेतु आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. सोनिया पंत सहित जनप्रतिनिधि और शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारी एवं जिला स्तरीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े।